काश बता पाते तुम्हें,
इतना ही जता पाते,
चाहते ना चाहते समझाते बुझाते,
कितनी मोहब्बत करने लगे हैं।
रोज़ एक नई उम्मीद सी उमड़ती हो,
थोड़ा प्यार देती तो बगीचा ही बन जाते,
पहले शब्द नहीं अक्स बतलाते,
समझ जाती नहीं तो आंखों में दिखाते।
एक दिन झुकी नजरों को देखोगी,
सोचा था खुद ही समझ जाओगी,
आजकल तुम्हें देखती भी नहीं,
खैर छोड़ो, अब जान लो…
कितनी मोहब्बत करने लगे हैं तुमसे…
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