Category: Collections

Curated anthologies — single posts that gather many short pieces: couplets, aphorisms and fragment-poems, grouped by theme.

  • Fragments & Aphorisms

    1.
    My obvious is not very obvious for others, but obviously, I don’t give a shit about it.


    2.
    Anger is the exact moment when you realize that you actually can’t control situations, nothing but just unawareness.


    3.
    The pursuit of happiness is the root cause here.


    4.
    To seek is to find,
    To find is to trust,
    To trust is to believe,
    To believe is to hope.


    5.
    The hardest thing to do is to pretend.


    6.
    Endings are just beginnings in disguise.


    7.
    The quest for satisfaction.


    8.
    In between something and everything, to the everyday fight of making peace, and to seek the lost thyself, only to find nothing but memories…


    9.
    Paradox is hoping to see you every day, and then ignoring you like you are no one.


    10.
    I often feel that I have said something, just to find out later it was all in my head, and I was awfully quiet for a long time staring blankly into the other person’s eyes and waiting for their response.


    11.
    It’s not giving up, why choose to run if we can stand still for the moment?
    We are not dogs,
    We aren’t supposed to run behind everything, are we?


    12.
    I was up writing all night,
    I wrote everything off my head,
    When I looked down on the paper
    Only ‘YOU’ was written…

  • ज़िंदगी, होड़ और ख़ुद

    1.
    किसी रोज़ अपनी शख्सियत से मसरूफ तो हो,
    ज़िन्दगी से जितने भी इल्म हैं, सब समझ जाएगा।


    2.
    शोर के बीच ये मेरी चुप्पी,
    सुनके मैं खुद ही चौंक जाता हूँ!
    सच तो होता नहीं बर्दाश्त तुम्हें,
    झूठ मैं बोल नहीं पाता हूँ…!


    3.
    चलो फिर चले घर, गुजारे एक दिन और सराय में,
    कुछ दिन और सही, गुजरे ये वक्त भी।


    4.
    कुछ लोग चल रहे हैं…
    कुछ और दौड़ रहे हैं…
    कुछ तो व्यायाम भी…
    एक शख्स अकेले बैठे ये सोच रहा है…
    अब आगे करना क्या है…


    5.
    वक्त-ए-हिसाब में रो पड़े,
    पैसे थे लगा बहुत कमाया जिंदगी भर,
    दरअसल उसके अलावा कुछ और था ही नहीं।


    6.
    दौड़ते-दौड़ते जिंदगी तो संभाल ली तुमने,
    अब ये बताओ तुम्हें कौन संभालेगा?


    7.
    रुसवा हो गए जिंदगी से ये भी देख लिया,
    फायदा तो चुप रहने में ही है।


    8.
    ख्वाब ने पूछ लिया कुछ नया नहीं?
    मैंने सोचा और नहीं बोला,
    सब या तो पूरे हो गए,
    या सब चकनाचूर हो गए।


    9.
    गुलाम हैं सब अपनी परछाई के,
    कहीं इनकी भी अपनी दुनिया तो नहीं?


    10.
    अए जिंदगी, तुझे समझाते-बूझते,
    कुछ इस कदर रूठ गया हूँ अपने आप से,
    अब तो इत्मिनान भी इज्तिरार में ही मिलता है…


    11.
    अब कहीं जाकर लगने लगा था,
    उससे उम्मीद रखना छोड़ दी मैंने,
    एक बार फिर उसने मौका दे दिया,
    कि उम्मीद रखनी इतनी भी बुरी नहीं…


    12.
    सुबह के बहाने तैयार हैं हर जाने के लिए इस जंग से,
    लेकिन एक कारण रोज़ दफ्तर की राह दिखलाता है,
    बन लो जनाब पैसा, इंसान से क्या-क्या करवाता है…


    13.
    डर-डर की, आदत सी हो गई है डर की,
    अब इस डर का कोई डर नहीं…

  • वक़्त, जुदाई और किस्मत

    1.
    ख्वाहिशों में कुछ कसर रही होगी,
    शब्दों के रास्ते यूँ झलकती नहीं।


    2.
    किसी रोज़ जब हम मिले तो,
    लेखा-जोखा होगा पिछले कितने ही सालों का…


    3.
    काश, अक्सर और ख्वाहिशें,
    शायद ऐसे परिंदों के पर काट दिए जाते हैं…


    4.
    ख्याल शायद इतने भी बुरे नहीं होते,
    ना होने पे भी किसी का झूठा एहसास तो करा देते…


    5.
    कैसी ज़िद है किस्मत की,
    बेवजह ही तुम्हारे पास और फिर तुमसे दूर ले जाती है…


    6.
    याद तो आने के लिए है,
    जाने के लिए तो लोग होते हैं।


    7.
    अब अलग हैं तो वक़्त से क्या शिकवा करना उसके लिए।


    8.
    समय तेरे संकेत पर ठहरा, और हम तेरे किनारे पर खड़े रह गए।


    9.
    वक़्त से नाराज़ी कैसे करूँ,
    इज़्ज़त तो हमने उसने की है नहीं।

  • इश्क़, याद और तुम

    1.
    कुछ ख्वाहिशों की तमन्ना जरूर है दिल में,
    लेकिन तेरी खुशी से ऊपर कुछ भी नहीं।


    2.
    तुम संग कुछ यूँ उलझे, खुद को ही भूल गए।


    3.
    तेरी यादों को कुछ इस तरह सँजो के रखा है,
    अपना शहर भी बेगाना हो गया,
    दोस्तों की महफ़िल भी तन्हा हो गई।


    4.
    सोचता हूँ तुमसे शिकायतें करूँ,
    फिर तुम्हें हंसते देख सब भूल जाता हूँ


    5.
    लफ्ज से अक्स तक बस अब
    तुम्हारे प्यार के कैदी हैं।


    6.
    गुस्से में अक्सर वो हमारे गले लग जाती है,
    और भी ज़माने भर के शिकवे यूँ ही भूल जाती है।


    7.
    किसी रोज़ मंदिर में दिया ना जले तो मान लेना,
    तुम्हें आज हमने याद नहीं किया


    8.
    वक्त देखा तो एक पहर बीत गया था,
    लेकिन तुम्हारी याद अभी ताज़ा थी।
    सोचा कुछ करें और बाहर चलें,
    निकले ही थे, तुम वहाँ भी मिल गई।


    9.
    तुमने तो कह दिया कि मुझे भूल जाओ,
    घर दोस्त जो भुला दिए तुम्हारे लिए वो?


    10.
    किसी रोज़ आऊंगा तो एक तोहफा लाऊंगा,
    आज भी दिल में छुपा के रखा है तुम्हारी हंसी को।


    11.
    तुम्हें सोचता हूँ हर रोज़,
    लेकिन अब और नहीं…


    12.
    अरसो पुरानी एक आरज़ू,
    गुफ्तगू हो और जुस्तजू भी।


    13.
    अब तुम्हारे होने की ऐसी आदत हो गई है, तुम नहीं होती तो अधूरी सी हो जाती है जिंदगी।


    14.
    तुम याद करोगी तो बहुत कुछ बोलूंगा,
    खैर छोड़ो कल की बातें,
    अब तुम्हें बस ये इतला कर दूं,
    अब फिर से तुमसे उम्मीद करने लगे हैं…


    15.
    दिल ने जब-जब इस दुनिया को टटोला,
    कुछ उलझे रिश्ते और कुछ रूठे हुए प्यार ही पाए…