तेरे चेहरे को देख-देख,
यूँ ही हँसते-हँसाते रहे,
तुझे पता भी ना था,
किसी किनारे हम भी बैठे थे।
तेरे मेरे बीच के दरमियाँ से
कहे भी तो क्या बेकार में,
तुम पूछती तो कुछ कहते, लेकिन
महफ़िल में तन्हा तो हम ही थे…
तेरे चेहरे को देख-देख,
यूँ ही हँसते-हँसाते रहे,
तुझे पता भी ना था,
किसी किनारे हम भी बैठे थे।
तेरे मेरे बीच के दरमियाँ से
कहे भी तो क्या बेकार में,
तुम पूछती तो कुछ कहते, लेकिन
महफ़िल में तन्हा तो हम ही थे…
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