एक रोज़ उठा तो एक शख्स मेरे पास खड़ा था…
अलग सी कद-काठी और चेहरा उसका,
आंखें थीं लेकिन होंठ नहीं,
बाल थे लेकिन भौंहें नहीं,
मैं चौंका और पूछा, “कौन हो भाई?”
धृष्ट वो आदमी वैसे का वैसा खड़ा रहा,
गुस्सा आया और मैंने पकड़ा,
फिर भी वह हिला नहीं वहां से।
मैंने और जोर से कोशिश की,
जितना उसके पास जाऊं उतना वह मुझपे हावी हो जाए।
कुछ समझ नहीं पाया,
तो हार कर पत्नी को जगाया,
“देखो ये कौन है?”
पत्नी ने नींद से उठकर बड़बड़ाई,
“पागल हो गए हो, कोई नहीं है यहां।”
यह कहकर वह फिर सो गई।
मैं विचलित मन से उस शख्स को देखता रहा,
सोचा कि क्या आफत गले पड़ गई,
धर्म संकट में था तो संकट मोचन को भी याद कर लिया।
कुछ समझ नहीं आया और शख्स मुझे देखे जाए,
मेरा पारा चढ़ने लगा,
और मैंने उसे एक मुक्का मार दिया,
हुआ कुछ नहीं, मुझे ही दर्द हुआ।
कराहते हुए बैठ गया और सोचा, “हैं क्या ये बला?”
मानो जैसे जिद सी सवार हो गई हो मन में,
बहुत सोचा और समझ आया,
ये और कोई नहीं, मेरी ही जिद है जिंदगी की।
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मेरी ही ज़िद
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होड़
होड़ लगी है नंबर लाने की,
होड़ लगी है डिग्री पाने की,
होड़ लगी है प्यार करने की,
होड़ लगी है पैसा कमाने की,
होड़ लगी है भव्य मकान बनाने की,
होड़ लगी है बच्चों को सुंदर दिखाने की,
होड़ लगी है बड़ा मंदिर मस्जिद बनाने की,
होड़ लगी है दूसरों को छोटा दिखाने की,
होड़ लगी है इसी होड़ में खो जाने की। -
एक ख़्वाहिश
एक ख़्वाहिश मेरे मन की —
बारिश हो… और तुम।घबराई-हुई-सी एक साँस,
जो तुम्हारी धड़कनों से टकराकर
अपनी रफ़्तार भूल जाए;
कंधा मेरा हो… और सिर तेरा,
जैसे थककर तुमने दुनिया छोड़ दी हो।तुम और मैं —
एक भी, दो भी;
भीगते हुए तुम्हारे बाल,
और मेरे हाथ…
जो उन्हें सुलझाते-सुलझाते
तुममें ही उलझ जाएँ।वक़्त का पता हो भी… और नहीं भी;
हर पल ठहरता हुआ,
हर लम्हा फिसलता हुआ;
जुस्तजू हो दिल की क़रीबी की,
हर कोशिश — तुम्हें जानने की,
और उसी में, अपने दिल को पहचानने की।दुनिया से कहीं दूर,
तुममें यूँ खो जाने की,
कि लौटने का रास्ता भी याद न रहे।ख़लिश हो… तेरे पास आने की,
और डर भी — कि ये दूरी कहीं हमेशा की न हो जाए;
डरते हुए तेरा हाथ पकड़ने की,
जैसे छूट गया, तो सब कुछ बिखर जाएगा।तुझे खो देने की बेचैनी भी,
तुझे पा लेने की बेबसी भी;
तुझे भूल जाने की हर कोशिश,
और हर कोशिश में, तुझे और गहराई से पा लेना।तेरे लिए ख़ुद को भूल जाने की,
और उस भूल में, ख़ुद को पहली बार पा लेने की।दुनिया को छोड़ देने की;
तेरे लिए गीत नहीं… अपनी ख़ामोशी तक गुनगुनाने की;
तेरे लिए कुछ नहीं… सब कुछ कर जाने की।और फिर… उस सब के बाद भी,
एक अधूरी-सी तड़प के साथ —
फिर एक बार नहीं, हर बार,
तुझसे प्यार करने की। -
दर्द की तर्जीह
बे-रंग नहीं, मैं आधा ज़िंदा हूँ इन रंगों में,
एक सुकून भी छुपा है मेरी ही बे-चैनियों में।खुद को ढूँढने निकला था तेरी यादों के रास्तों पर,
पर तुझे खोना भी कब से शामिल है मेरी रज़ाओं में।तुझे भूल जाना चाहता हूँ…
मगर यादें इंसान से ज़्यादा वफ़ादार होती हैं।शायद आदत पड़ जाए खामोश रहने की,
पर कुछ आदतें जान नहीं लेतीं —
खुद को मार देती हैं।आज कुछ टूटा नहीं…
आज मैं पूरी तरह गिर पड़ा हूँ,
इतना कि खुद को उठाने का भी मन नहीं।ये हार प्यार से नहीं लगी —
ये वार मेरे अपने होने पर हुआ है।कभी सोचता हूँ, किसी पहाड़ पर तू मिल जाए…
तो क्या मैं पुकारूँगा?
नहीं।
शायद बस दूर खड़ा रहूँगा —
तेरी आवाज़ को हवा में महसूस करते हुए,
और सोचूँगा…
शायद जो खोया, वही मेरी किस्मत था।किसी ने सच कहा था —
कुछ नहीं रखा इस प्यार में।
प्यार में सबसे ज़्यादा दर्द जुदाई का नहीं,
प्यार के खत्म होने का होता है।तन्हाई ने मुझे एक राज़ बताया —
दिल सिर्फ टूटता नहीं…
कभी-कभी वो बिना आवाज़ राख भी बन जाता है।और लोग पूछते हैं —
“तू ठीक तो है?”
काश मैं कह पाता…
“मैं अब मौजूद नहीं।”पर एक सच्चाई और है —
दर्द मुझे खत्म नहीं करेगा।
मैं इस दर्द को गले लगाऊँगा,
क्योंकि यही अब आख़िरी चीज़ है
जो तुझे मुझसे जोड़ती है।तू गया… पर दर्द रह गया।
और सच कहूँ —
तेरे जाने से ज़्यादा,
मुझे इस दर्द से मोहब्बत हो गई है। -
To My Little One
I dream of you every single day;
your smile lights up my world in the gentlest way.
No one could be prouder than I am of you —
my kiddo, in all you do, I find a joy so true.So many times, I wanted to stay,
when you said, “Dada, don’t go away.”
I wished to pause the world outside,
just to sit with you, and be by your side.So often, I longed to leave it all behind,
to listen to your stories — unhurried, unlined.
There’s so much I want to say and share,
about the love I hold, beyond compare.I could guard you fiercely at every turn,
shield you from pain, from lessons you’ll learn.
But my dream is deeper, my wish is true:
to see you stumble, rise, and push through.One day, when I’m no longer near,
I want you to stand tall, without fear.
Cry if you must, then wipe your tears —
and face the world, my love, beyond your years. -
Is It or Isn’t?
Is it, or is it not,
this weight upon my mind —
these chains of expectation
that tether me to time?Is it, or is it not,
the whispers of the past,
the duties and the norms
that bind me in their clasp?To break, or not to break,
from all that’s deemed as right;
to wander through the shadows,
to flee into the night.Is it, or is it not,
the call of distant dreams —
the urge to leave the structure,
to tear apart the seams?To live, or not to live,
in patterns so confined;
to seek a path less travelled,
to free the heart and mind.Is it, or is it not,
a question that divides —
the longing for the open,
the fear of shifting tides?Yet somewhere in the silence,
a voice begins to sing —
a melody of freedom,
a flight on unbound wings.To break is to discover,
to cast off all we’ve known,
to walk into the future,
uncharted, and alone.Is it, or is it not,
the courage we must find —
to loosen all the bindings,
and leave it all behind?