दौड़

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यह दौड़ है कैसी,
जिसमें रोज़ है हार-जीत;
रोज़ कोई डरता है इस दौड़ से,
और फिर अपने ही कल में खो जाता है।

बेबसी से चलता आज का कल,
और पल-पल खोता अपना जीवन;
समझ से सब दूर जैसे —
लेकिन अक्सर, यह सोच, दिल रोता है…

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