ज़िन्दगी है एक रंगमंच,
जिसने जो बोला, वो सच का साया;
जिसने जो देखा, वही उसने सोचा।
कुछ वक़्त का नाटक,
और फिर सब कुछ ग़ायब।
यहाँ है हर रोज़ एक तमाशा,
लेकिन सच को भला किसने समझा?
क्योंकि ज़िन्दगी तो है, बस, रंगमंच का एक साया…
ज़िन्दगी है एक रंगमंच,
जिसने जो बोला, वो सच का साया;
जिसने जो देखा, वही उसने सोचा।
कुछ वक़्त का नाटक,
और फिर सब कुछ ग़ायब।
यहाँ है हर रोज़ एक तमाशा,
लेकिन सच को भला किसने समझा?
क्योंकि ज़िन्दगी तो है, बस, रंगमंच का एक साया…
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