ज़िन्दगी का खेल

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ज़िन्दगी भी मस्त खेलती है —
मैं चलना सीखता हूँ, ये भागने लगती है;
मैं भागना सीखता हूँ, ये रुक जाती है;
मैं रुकना सीखता हूँ, ये बदल जाती है;
मैं बदलना सीखता हूँ, ये समझ नहीं आती;
मैं समझना सीखता हूँ, ये उलझ जाती है;
मैं सुलझाना सीखता हूँ — ये फिर चलने लगती है।
मैं फिर चलना सीखता हूँ…

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