इश्क़ की किताब

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इश्क में न चाहते हुए भी जिंदगी की किताब में हजारों पन्ने शायरी के जुड़ जाते हैं,
और उसकी इश्क में उसकी किताब में कुछ पन्ने इश्क में लहूलुहान भी हो जाते हैं,
फिर जब वो पन्ने हकीकत में सहने होते, तो समझ नहीं आता…
कि दिल शायर हो गया है, या दिल में दर्द इतना है…
जनाब ये इश्क चीज ही ऐसी है।

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