Category Archives: Hindi Poems

तुम और तुम्हारी सी

 

 

 

 

 

 

 

मंद मंद हवा सी बहती , बेफिक्र एक जिद और जूनून  सी चलती ,
नशे से गहेरी एक सोच की तरह , वक्त की चोट से पूरानी एक याद की ,

सुबह की चादर में सोती ,धीरे धीरे गिरती बूँदें ओस की ,
रात की शबनम  और दिन में  बुनती ,जगमगाती झिलमिल रंगों मे बनती भुजती ,

ठण्ड में ठितुर्ती और सोती ,एक साये  मे आती खो जाती सी  ,
एक आस दिल में चुभती हुई सी ,तुम्हारी याद में चलती ज़िन्दगी ,

बस तुम और तुम्हारी सी …….

शब्दो में डूबती ,सन्नाटा में छुपती सी ,
शाम की दलदल सी ,उम्मीद के दामन में लिपटी ,

चाय के प्याले में खुली ,मीठी सी एक सपने में खोती ,
एक तनहा रात सी , आँखों में झूलती एक उम्मीद सी ,

ज़िन्दगी से लडती झगती ,याह वोह एक दिन सी ,
छुप  छुप के हँसती , तुम्हारी याद में चलती ज़िन्दगी सी ,

बस तुम और तुम्हारी सी …….

सफ़र से लंमी प्यार की ,आँखों से छोटी बात की ,
गहेरी सांसों में छुपती ,लम्हों में भीगी यादों सी ,

इधर उधर चलती एक कहानी के  ,पलटते  पनों सी ,
हसी के चेहरे से हसीन ,दुआ और दावा सी ,

मैं और तुम में  बुनती ,एक याद तुम्हारी सी ,
भीगी भीगी पलकों से  , तुम्हारी याद में चलती ज़िन्दगी सी ,

बस तुम और तुम्हारी सी …….मेरी ज़िन्दगी.

 

रंगमंच

ज़िन्दगी हें एक रंगमंच ,
जिसने जो बोला वोह सच का साया ,
जिसने जो देखा वोह ही उसने सोचा ,
कुछ वक़्त का नाटक ,
और फिर सभ कुछ गायब ,
यहाँ हें हर रोज एक तमासा ,
लेकिन सच को भला किसने समझा ,
क्यों की ज़िन्दगी तोह हें रंगमच का एक साया ….

दौड़

दौड़ हें यह  कैसी ,
इसमें  हें  रोज  हार  जीत  हैं ,
रोज  कोई  डरता  हें इस  दौड़  से ,
और  फिर  अपने  ही  कल  में  खोता  है ,

बेबसी  से  चलता  आज  का  कल ,
और  पल  पल  खोता  अपना  जीवन ,
समझ  से  सब  दूर  जैसे ,
लेकिन  अक्सर  ये  सोच  दिल  रोता  है …

ज़िन्दगी की यह छाया

जिंदगी की कुछ शाम जगमगाती ,

और कुछ सुबह लडखडाती ,

इस ज़िन्दगी के कुछ साथी ,

और कुछ की याद , कुछ साथ ही,

कही दूर बैठे सोचेते और हम हस्ते ,

कभी रोती तोह कभी हम्हे मनाती ,

फिर कुछ वक़्त हस्ती रहती ,

एक छोटी सी ज़िन्दगी ,

कभी कुछ खोते , कभी कुछ पाते ,

समझ से कही दूर हैं यह ज़िन्दगी ,

जभ कभी कोशिश करते ,

इतने मैं चल पड़ती हैं जिंदगी की यह सवारी ,

कभी पतझड़ सी काया ,

और कभी सुन्दर सी काया ,

मेरी एक दोस्त

मंद मंद हवा सी बहती ,बेफिक्र खिलखिलाती वोह हस्ती,
महकती बहकती किसी को बहलाती ,दीवाना बनाती ,वोह हस्ती,

एक पल के लिए थाम लेती ,वोह सभ के सपनो की डोर ,
फिर छोड़, बचो से नादान बनती कहती , हूँ ही मैं इतनी अच्छी ,

अक्सर आँखों से कुछ बोलती , जुबान से कुछ और ,
यु तोह हस्ती थी वोह हर वक़्त , लेकिन रोती भी थी कभी कभी ,

फिर भी हस्ती खिलखिलाती ज़िन्दगी से खुश चलती रहती वोह मेरी एक दोस्त …..

ज़िन्दगी

हैं छोटी सी उड़ान यह चलती फिरती ज़िन्दगी,
सागर से गहेरी असमान से उच्ची, कुछ लफ़्ज़ों की ज़िन्दगी,
किसी की चाहत की ,किसी के मुस्कराहट की ,हस्ती यह ज़िन्दगी
रंग बदलती ,सुरों मैं सजती, नन्ही सी ज़िन्दगी

ख़ामोश नज़र

जब वोह ख़ामोश नज़र से मुझे देखती हैं ,

कुछ कहते कहते नजाने कहा खों जाती हैं,

जब मैं उससे नज़र मिलाये कहता हूँ,

कुछ तो बात हैं ज़ो आप बताता चाहती हैं,

झुकी  हुई पलको से वोह मुह मोड़ लेती हैं,

फिर धीरे से एक झूठ ही सही बोलती हैं ,

कुछ कहना होता तो कहे देती,

पर नजाने क्यों यह बात मुझे बैमानी लगती हैं,

Muskurahat

jabh kabhi mai khamosh hota ho
kisi dukh ke andhere mai kho saa jata hu
mujhe ek awaz, ek hassi sunti hai
woh ek tumhari muskurahat………

lagta hai ek adat si hogyi hai
mujhe sapno mai gum ho jaane ki
isliye ki mujhe mili woh khushi
shayad woh tumhari ek muskurahat ki…

kabhi kabhi chehro mai dhundhta rehta hu
mile mujhe phir waisi koyi hassi
magar nahi koyi mili abhi tak
woh ek muskurahat jani anjani meri ek dost ki…..

भीड़ कुछ जादा हैं

 


ना जाने क्यों भीड़ कुछ जादा हैं ,

मै खो ना जाऊ , इसमें कही

जब हम भी अनसुना करते थे ,

आज,हम भी हुए तोह ऐसा क्या हैं,


ना जाने इस बार क्या खास बात हैं,
अकेले से दिख रहे है ,चहेरे कई,
कुछ कहे रहे है,लेकिन कई कुछ नहीं,
लगता है भीड़ की तन्हाई ही ऐसी हैं,

ना जाने क्यों भीड़ कुछ जादा हैं,
सोचता हु ,मैं भीड़ ही बन जाऊ,
अपने जाने पहचाने कुछ चहेरे थे,
बेगानी से भीड़ मे छुपे हैं, वोह भी

ना जाने इस मैं क्या बात हैं,
भीड़ मे खोये हम,तभ भी कुछ याद हैं,
भूले नहीं जिसे हम कभी भी ,
वोह ही हमारी तन्हाई की याद हैं,

ना जाने क्यों भीड़ कुछ जादा हैं,
हैं इस इन्तेज़ार मै हम भी मगर,
शायद कोई पुकारे भीड़ से हमहे ,
तोडे येह पल पल मारता अँधेरा ,

Na Kiya Hota!!!

    Tanhai ke pal se jab mile hum
    dil mai na jane kaha ek tis huyi
    socha pyar ki rachna kisne ki
    us din tumhare pyar ki yaad ayi
    socha kisne kaise aur kyu bnaya
    kabhi khushi ki baris hoti hai
    kabhi apne hi lahu ke asshu ki
    lekin baat meri samajh jarur ayi
    na kiya hota pyar humne tumnse
    sayad aise kathan toh na hota
    yu raat ko tanhai mai jage na hote
    yumahri yad mai yu toh na rote
    na jane kitne aur aise hoge
    kitne hi mere tarah akele hoge
    mujhe nahi pta kya hoga mera
    jeevan ki kaun se maud per jayu ga
    per nasakat samajh toh aah gyi
    ishq se badi koyi saza nahi hoti
    kash humne bhi ishq na kia hota
    tanhai ka dard humhe bhi na hota
    waqt ki chot se yu rubaro na hote
    nah hi koyi humhe rulane wala hota;